दिनेश लाल यादव को कहाँ से मायूस होकर लौटना पड़ा था 

दिनेश लाल ने करियर की शुरुआत बिरहा के साथ किया

दिनेश लाल यादव भोजपुरी के एक जाने-माने सुपरस्टार है. दिनेश लाल यादव जिंदगी में काफी गरीबी देखी है, और आज जिस मुकाम पर हैं 1 दिनों में इसे नहीं पाया है. कड़ी मेहनत तथा बरसों का संघर्ष है जो आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं. दिनेश लाल यादव ने अपना करियर की शुरुआत बिरहा गायन के साथ किया था. बिरहा गायन इनके बड़े भाई विजय लाल यादव भी करते हैं. उन्हीं से इन्होंने बिरहा गायन सिखा. दिनेश लाल यादव गांव में छोटे-मोटे कार्यक्रमों में गायन वादन करते थे. इनकी सफलता मिलती गई और आज एक सफल तथा स्थापित एक बड़े सुपरस्टार हैं.

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दिल को झकझोर देने वाली घटना का उन्होंने एक जिक्र किया

दिनेश लाल यादव ने कुछ दिनों पूर्व अपने एक Facebook पर पोस्ट डाला था, जो काफी ज्यादा मार्मिक तथा दिल को झकझोर देने वाली घटना का उन्होंने एक जिक्र किया है. यादव ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “मैं पटना से एक कार्यक्रम करने के बाद वापस हैदराबाद जा रहा हूं. जहां एक आने वाली भोजपुरी फिल्म जय वीरू की शूटिंग चल रही है. उसी शूटिंग के लिए मैं वापस हैदराबाद जा रहा हूं. दिनेश लाल यादव ने कहा कि पटना से फ्लाइट लैंड करने के बाद अभी दूसरी फ्लाइट का मैं इंतजार दमदम एयरपोर्ट पर कर रहा हूं. दिनेश लाल यादव ने आगे अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि इस दमदम एयरपोर्ट से एक घटना जुड़ी हुई है.”

dinesh lal yadav facebook post
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अपने पिताजी के साथ बिना जहाज देखे,उन्हें मायूस लौटना पड़ा था 

उन्होंने फेसबुक पेज पर लिखा कि वह उस समय आठवीं क्लास में पढ़ रहे हैं थे. तो उनके पिताजी ने उनको तथा उसके फैमिली मेंबर को दमदम एयरपोर्ट पर जहाज दिखाने के लिए सभी को लाए थे. जहां ₹20 के टिकट लेने के बाद कोई भी व्यक्ति बगल से जहाज देख सकता है. इसी सुविधा को लेने के लिए अपने पिताजी के साथ आए थे. लेकिन जब इनके पिता जी ने टिकट के लिए गए तो पता चला कि यह सुविधा काफी दिन पूर्व बंद हो चुकी है. इसे दिनेश लाल यादव जी को अपने पिताजी के साथ बिना जहाज देखे, मायूस लौटना पड़ा. इस घटना से दिनेश लाल यादव को काफी ज्यादा आहट हो गए थे.

दिनेश लाल यादव अपने माताजी के साथ

दिनेश लाल यादव अपने माताजी के साथ

हर आदमी के पास जहाज में बैठने के लिए पैसे नहीं होते हैं

लाल यादव ने गुस्से में अपने पिताजी को कहां की यदि एक गरीब आदमी जहाज में बैठ नहीं सकता है, तो जहाज देखने से उन्हें मना तो नहीं करना चाहिए. क्योंकि हर आदमी के पास जहाज में बैठने के लिए पैसे नहीं होते हैं. कम से कम एक गरीब आदमी के लिए यह सुविधा कम से कम बंद तो नहीं करनी चाहिए थी. क्योंकि गरीब आदमी  जहाज में बैठ नहीं सकता तो कम से कम जहाज को दूर से देखकर संतोष तो कर सकता है.

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ईमानदारी से काम करोगे तो एक दिन तुम जहाज से ही चल सकते हो

इस पर इनके पिता जी ने इन्हें समझाते हुए कहां की यदि तुम ईमानदारी से काम करोगे तो एक दिन तुम जहाज से ही चल सकते हो. जो आज पिताजी की बातें सच साबित हो गई. दिनेश लाल यादव ने आगे अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि आज हम जो कुछ भी हैं, वह हमारे पिता जी की आशीर्वाद तथा दर्शकों का अपार प्यार के कारण ही है. उन्होंने कहा कि पिताजी मरते दम तक हम ईमानदारी से काम करते रहेंगे. चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े.

dinesh lal yadav with Amarpali dubey
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यह घटना शायद लाखों-करोड़ों लोगों की है जो गरीब है

यह एक घटना केवल एक इंसान की नहीं है यह घटना शायद लाखों-करोड़ों लोगों की है जो गरीब है. जो कि जहाज से चलने में या जहाज का एक टिकट खरीदने के पैसे इनके पास नहीं है. और आज भी हमारे देश में लाखों करोड़ों लोग गरीबी रेखा से  नीचे जीवन यापन कर रहे हैं.
वास्तव में यह एक दिनेश लाल यादव की घटना लाखों-करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करती है. शायद ख्वाहिश जहाज को छूने की होती होगी और इसी ख्वाहिश को लेकर लाखों लोग इस दुनिया से चले भी जाते होंगे.

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निष्कर्ष 

सच कहा जाए तो जहाज देखने की क्या छूने की जो सुविधा थी वो बंद नहीं करनी चाहिए थी. क्योंकि एक दिनेश लाल यादव की तरह ना जाने कितने गरीब बच्चों को इस तरह की लालसा होती होगी कि वह जाकर के जहाज को कम से कम जहाज को बगल से उड़ते हुए देखे तो सही.

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5 thoughts on “दिनेश लाल यादव को कहाँ से मायूस होकर लौटना पड़ा था ”

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